Campaign messages in Hindi

पेरेंटिंग अभियान २०१९
दण्ड या सकारात्मक अनुशासन - अंतर जानिए
 
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी पुस्तिका "दण्ड देना- फायदेमंद या हानिकारक" पढें। Click here to see and download ( only English version available now. Hindi version available soon)
 
बच्चों को अनुशासित करने के सही तरीके पर फिल्म देखने के लिए, यहाँ क्लिक करें

 

दिन 10 

जब बच्चों को बार-बार दंड दिया जाता है तो वे शर्मिंदगीक्रोध और आक्रमकता उनके  व्यसक जीवन पर भी बुरा प्रभाव डालती है

दंड देना समाज में हिंसा और असंतोष को बढ़ाता हैं।

 

जब बच्चों की परवरिश आदरपूर्ण और प्रेमभरे वातावरण में की जाती हैं तो वे बड़े हो कर दूसरों के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील होते हैं।

सकारात्मकअनुशासन एक सहानुभूतिशील समाज का निर्माण करने में मदद करता है।

 

दिमाग का विज्ञान : माता-पिताशिक्षकऔरदेखभाल करनेवाले बच्चे की बुद्धि के निर्माणकर्त्ता हैं।बच्चों के साथ हमारा बर्ताव उनके दिमाग को विकसित करता  है।जब हम बच्चों को ख्याल से बड़ा करेंगे तभी बच्चे बड़े होकर ख्याल करेंगे



दिन ९

"अरे.. अपने दोस्त के साथ खिलोने मिल बाँट कर क्यों नहीं खेल रहे? तुम इतने स्वार्थी क्यों हो? यदि तुम मिल बाँट कर नहीं खेलोगे तो मैं सारे खिलौने उठाकर अंदर रख दूँगी | किसी को भी खिलोने नहीं मिलेंगे ।"
दंड मिलने पर बच्चों को खुद पर शक होता है और उनके आत्मा सम्मान को ठेस पहुँचती है ।

“जब तुम्हारे दोस्त घर आये थे , तो मैंने देखा कि तुम अपने खिलौने उनको नहीं दे रहे थे । शायद कुछ खिलोने तुम्हारे बहुत पसंदीदा हैं जिन्हें दूसरों के साथ बांटने में तुम्हे कठिनाई होती है । अगली बार दोस्तों के आने से पहले ही क्या तुम कुछ खिलोने अंदर रखना चाहोगे ? तुम तय कर सकते हो कि कौनसे खिलोने मिल बाँट कर खेलने में तुम खुश हो| "
सकारात्मक अनुशासन बच्चों को सोचने और निर्णय लेने के अवसर देकर सम्मानपूर्वक मार्गदर्शन करता है।

'योर चाइल्ड्स सेल्फ-एस्टीम' पुस्तक की लेखिका  डोरोथी ब्रिग्स के अनुसार, जब बच्चों को बताया जाता है कि वे शरारती, जिद्दी, आलसी, बुरे आदि हैं तो वे इन बातों को अपने बारे में मानना ​​शुरू कर देते हैं। हम माता-पिता एक दर्पण की तरह हैं और हम जो दर्शाते हैं वह बच्चे स्वयं की छवि मान लेते हैं। ये लेबल बड़े होने पर भी उनके साथ रहते हैं। 


दिन 8

जब हम बच्चे को मारते हैं, डांटते हैं, धमकाते हैं या बच्चे को टाइम-आउट में डालते हैं, तो बचछे को चोट पहुँचती है ओर वह और अकेला महसूस करता है।

दंड देने के कारण माता-पिता और बच्चे के बीच का बंधन कमज़ोर पद जाता है |

 

बच्चों को ज्ञात होता है कि हम उन्हें समझते हैं जब हम बच्चों के साथ मिलकर समस्ययो का हल खोजते है, सहानुभूति के साथ सीमाऐ निर्धारित करते हैं, संवेदनशीलता के साथ बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं, हमारी अपेक्षाओं का सम्मानपूर्वक संवाद करते हैं और जब हमारी गलती होती है तब बच्चे से माफी मांगते हैं |

सकारात्मक अनुशासन संघर्ष के समय में भी माता-पिता और बच्चे के बीच के संबंध बनाए रखता है।

 

दिमाग का विज्ञान : सेंटर ऑन द डेवलपिंग चाइल्ड, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार, माता-पिता के साथ प्रेमभरा और ममतापूर्वक व्यव्हार ही बच्चे की बुद्धि के उत्तम विकास में सहायक होता है |

 
 
 
 

दिन 7


"अपने भाई को मारना बंद करो। उसके साथइतने बुरे से क्यूं पेश आ रहे हो?”माता पिता बच्चे से गुस्सा हो कर उसे थप्पड़ लगा देते हैं

बच्चों पर हाथ उठाना या उनपर शारिरीक बल का उपयोग करना बच्चों को सिखाता है कि अपने गुस्से को व्यक्त करने का यह सही तरीका है। यहाँ हम बच्चों के लिये सकारत्मक रोल मॉडल नहीं बन पाते हैं।


"किसी परहाथ उठाना गलत बात हैहमारेघर में मार पीट मना है | आपको अगर कोई बात च्छी नहीं लगी तो शब्दों का प्रयोग करके अपनी परेशानी बताओं"

सकारत्मक अनुशाशन के जरिये हम बच्चों के आदर्श बन सकते हैं।और उन्हें बता सकते है कि जब हम गुस्से में होते हैं तब भी हम बिना चोट या हिंसा का उपयोग किए बिना खुद की भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं।

 

दिमाग का विज्ञान : बच्चों को यह बात आतंकित करती है कि जो व्यक्ति उन्हें इस दुनिया में सबसे सुरक्षित रख सकता हैं वही उन्हें नुक्सान पहुंचा रहा हैं। इस परिस्थिति में बच्चे का दिमाग 'फाइट या फ्लाइट मोड' में चला जाता है। और ऐसे में बच्चा परिस्थिति से या तो भाग जाना चाहेगाहै या फिर पलट कर मारनाचाहेगा.

 

दिन 6


"मैं तुम्हारे लिये यह नहीं खरीद रहा हुँ| गर तुमने रोना बंद नही किया तो मैं तुम्हे यहीं छोड़ कर चला जाऊंगा"

 

दंड और धमकियां बच्चों को भावनाओं को छिपानेके लिए मजबूर करती है।बाद में बच्चे इन भावनाओं को अस्वस्थ तरीकोंसे व्यक्त करते हैं जैसे गुस्सा होना,दूसरों को मारना या धमकाना।


" इतने सारे खिलोने देखकर तुम्हे खिलौना खरीदने का बहुत मन कर रहा है ना? जब मैंने खरीदने से माना कर दिया,मैं समझ सकता हुँ कि तुम्हे कितना बुरा लगा होगा "


सकारत्मक अनुशाशन में हम बच्चों की भावनाओं को समझते भी हैं और उन्हें सहानभूति के साथ स्वीकार भी करते हैं।

इससे बच्चों को आगे चलकर अपने भावनाओं को सही तरीके से सम्भालने में मदद मिलती है।


दिमाग का विज्ञान: बच्चों को उनकी भावनाओं को सम्भलना और उन्हे स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना सिखाया जा सकता है। बड़ों के संवेदनशील और सहायक प्रतिक्रियाओं से बच्चो में सहनशीलता और भावनात्मक बुद्धि का निर्माण होता है।"


दिन 5

सजा देने का असर सिर्फ थोड़े समय तक ही होता है |

माता पिता के आने की आवाज सुनते ही बच्चा दौड़ कर टी.वी.बन्द कर देता है। पढ़ाई करने के लिये जबतक चिल्लाया ना जाये, वो पढ़ने नहीं बैठता। "अगर तुमने अपना खाना खतम नहीं  किया तो तम्हें आइसक्रीम नही मिलेगी", खाना भी बिना धमकी के खतम नहीं करता।

इस स्थिति में ,बच्चे आज्ञा का पालन तब तक करते हैं जब तकउन्के माता पिता बात मनवाने के लिए मजबूर करते हैं। इस तरह का अनुशाशन बहुत देर तक टिकता नहीं|


कारत्मक अनुशाशन लम्बे समय तक के लिये अनुशाशन बनाए रखने में कामयाब रहता है।

समय के साथ बच्चा अपनी जिम्मेदारी समझने लगता है। अपने माता पिता के साथ मिलकर बच्चा जो भी नियम बनाता है या समय निशचित करता है, वो उसी के अनुसार टीवी बंद करके अपनी पढ़ाई करने बैठ जाता है|

जब माता पिता या देखभाल करने वाले लोग स्पष्ट रूप से नियम बनाते हैं या बच्चो को अपनी अपेक्षाएँ बताते हैं, तब बच्चे अपनेआप उन सीमओं में रहना और अपनी सीमा खुद निर्धारित करना सीख जाते हैं।

 

दिमाग का विज्ञान: जब बच्चे अपनी सीमा निर्धारित करने में खुद भाग लेते हैं, तब उनके नुयरल पाथवेस (तंत्रिका मार्ग) से दिमाग में सोंचने की शक्ती विकसित होती है। और यही उन्हें आने वाले दिनों में सही कारण के लिये सही कार्य करने में सहयता करता है।

 

दिन 4
 
"ये क्या गन्दगी फैला रखी है तुमने। अगर इसे अभी के अभी साफ नहीं किया तो मैं तुमसे कभी बात नहीं करूँगा"

बच्चे का पालन करने के लिए दंड का प्रयोग ,बच्चे पर हमारी पावर या धौस जमाने’ पर निर्भर हैमाता-पिता की प्रतिक्रिया के डर से और माता-पिता के प्यार को खोने के डर के कारण ही बच्चा सही काम करता है या उनकी बात सुनता है

 

 

"फर्श पर अगर चीजें बिखरी रही तो हम सब का चलना मुश्किल होगा और खासकर आपके दादाजी का। खिलौनों की जगह उनके बॉक्स में है। चलो हम दोनो मिलकर ऊन्हें सही जगह रखते हैं।
सकारात्मक अनुशासन बच्चे के साथ काम करने के लिए पावर  साथ साथ  प्रयोग करने के दृष्टिकोण का उपयोग करता है। समाधान खोजने के लिए माता-पिता और बच्चे एक साथ काम करते हैं।
 
 
दिमाग का विज्ञान: दिमाग का मुख्य कार्य हमें सुरक्षित रखना है। अपने बड़े होने के अधिकार का गलत उपयोग करना, जैसे की बच्चो के उपर हाथ उठाना या उन्हें धमकी देने से उनका दिमाग आतंकित महसूस करता है। मगर जब भी हम बच्चों के साथ मिलकर काम करते हैं, वे हमारा समर्थन महसूस कर सकते हैं और यही समर्थन उनकी सोंच और रचनात्मकता को विकसित करने में मदद करता है।

 
दिन 3
 
"शर्म आनी चाहिये तम्हें इतने कम मार्क्स लाने के लिये। अब से तुम्हारा दोस्तों के साथ घुमना फिरना बन्द"
सजा देने का एक ही उद्देश्य होता है कि किसी भी व्यवहार का कारण जाने बिना उस व्यवहार को वहीं रोक देना।
 
लगता है तम्हें गणित के सवाल हल करने में बहुत कठिनाई हो रही है। क्या तुम्हें अतिरिक्त अभ्यास के लिये ट्यूशन चाहिये?
सकारत्मक अनुशासन का उद्देश्य है बच्चे के व्यव्हार को समझना और उसके संघर्ष के पीछे के कारण का पता लगाना।
 
दिमाग का विज्ञान: बच्चो का दिमाग हमेशा उन्हें नयी चीजें पता लगाने के लिये और उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिये प्रेरित करता है। यदि वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में नाकाम हो रहें हैं तो हमारे लिये ये पता लगाना बेहद जरुरी है कि, उनको कहाँ तकलीफ हो रही है और हमें उनका साथ देना चाहिए।

दिन 2
 
 "तुम कभी भी स्कूल के लिये समय पर तैयार नहीं होते। मैं तुमसे तंग आ चुकी हुँ। अगर तुम समय पर तैयार नहीं हो सकते तो घर पर ही बैठो, स्कूल जाने की कोई जरुरत नही। जिंदगी में आगे कुछ भी मत करना।" 
बच्चों को दंड देना, पिछले बर्ताव  के बारे में शर्म पैदा करने पे केंद्रित है। 
 
"मैं देख सकती हुँ कि स्कूल के लिए समय पर तैयार होना हम दोनों के लिए बहुत कठिन है। क्या हम एक साथ बैठकर सोच सकते हैं कि इससे कैसे आसान बना सकते हैं? मैं वाकई में तुम्हारे सुझाव इस बारे में जानना चाहती हूं।" 
सकारात्मक अनुशासन बच्चे के साथ काम करने में समस्या को हल करने और भविष्य के नए बर्ताव को सीखने पर केंद्रित है। 
 
दिमाग का विज्ञान :बच्चों का उन्के बर्ताव के लिये लज्जित करना, उन्हे अपराध और भय की भावनाओं से अभिभूत करता है। इस अभिभूत (घबराए हुए) स्थिति में वो तर्कसंगत सोंच और समस्या हल ढूंढ़ने जैसे उच्च दिमाग कार्यों का उपयोग करने में असमर्थ हो जाते हैं।
 

 
दिन 
 
"इतना परेशान करना बंद करो। क्या तुम एक मिनट भी चुपचाप नही बैठ सकते? अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुम्हें एक तमाचा लगा दूंगी।"
हम अपने शब्दों और कार्यो के माध्यम से  बच्चों को दंडित करते हैं। सजा बच्चे के शरीर, दिमाग, हृदय और आत्मा को नुकसान पहुंचाती हैI
 
"मैं देख सकती हूँ की तुम्हें एक जगह पर बैठने में मुश्किल हो रही है। क्या तुम बाहर  जाकर खेलना पसंद करोगे या फिर यहाँ बैठकर चित्रकारी करना चाहोगे?"
सकारात्मक अनुशासन बच्चे के शरीर, मन, हृदय और आत्मा का सम्मान करते हुए बच्चों को अनुशासित करता हैI
 
दिमाग का विज्ञान : जब बच्चों को मारा जाता है या उन पर चिल्लाया जाता है, तो उनके शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल जारी होता है। अतिरिक्त कोर्टिसोल दिमाग के जीवकोषोंको को भी मार देता है।
 

 
 
 
 पेरेंटिंग मैटर्स के द्वारा जनहित में जारीI